माई की ममता के इ मोल?
तिजहरियवाँ छाँटी काटत रहनी तवलेकहीं माई घर में से हाँक लगावत निकललि, "ए मझिलू! ए मझिलू! काहाँ बाड़S हो? अरे तनि लवना-ओवना के इंतिजाम क देतS। दिन डूबे जाता।" हम माई के बोलावल सुनि के छँटिकट्टा में से बाहर निकलनी अउरी कहनी, "माई ते काँहे चिंता कइले बाड...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[14 Nov 2009 05:33 AM]



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