बुढ़ापे की संवेदना
बूढ़ा होता है हर कोई ढलती हुई उम्र के साथ ऐसा बूढ़ा न हो कोई उस बूढ़े, बुढ़िया के जैसा न खाना है न दाना है साथ नहीं है अपनों का एक सहारा बस बाकी है लाठी और अकेलेपन का सावन भी अब बूढ़ा सा है पतझड़ से सारे मौसम हैं एक अकेली कोंपल को बस तरसे विचलित सा उ...
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anupam mishra
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[14 Nov 2009 04:26 AM]



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