कतारें लगा कर खडा आदमी

Jogeshwar Garg कतारें लगा कर खडा आदमी मुझे भी बना दो बड़ा आदमी कभी तान सीना खडा आदमी कभी बुजदिलों सा पडा आदमी बड़ा ठोस चट्टान सा था मगर ज़रा छू लिया रो पडा आदमी लगे खूबसूरत मगर अर्थ क्या नगीने सरीखा जडा आदमी मिले चार पैसे कि पद मिल गया गया बिन पिए लड़खडा आदमी कभी हो... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

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[13 Nov 2009 12:01 PM]

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