आटा और रोटी
आटा गूंथना जीवन मथने जैसा ही तो है| उसकी लोई बना बेलन से आकार देना और गर्म तवे पर रख सेंकने भर से रोटी नहीं बनती, आग पर तपना भी होता है और इस तरह जलना होता है कि कही चिटक तक न लगे| जीवन क्या ऐसा नहीं? फिर दुःख ... कहते है रोटी को चबा चबा कर खाना पाचन...
[पूरी पोस्ट]
अमिताभ श्रीवास्तव
19
0
0
0
10
[13 Nov 2009 09:23 AM]



Shuffle








