हमें नेता नही प्रबन्धक चाहिये!

जंगल कथा एक कविता जो मैने अपने बचपन में लिखी थी और आज मुझे एक टुकड़ा मिला है उसका जो फ़टा हुआ था बचे हुए अंश................ नेताओं के इस जंगल में नेताओं के इस दंगल में तिल-तिल जलता है इंसान (शोषित होता है इन्सान) नेताओं के इस दलदल में फ़ंसता रहता है इन्सान न... [पूरी पोस्ट]
writer Krishna Kumar Mishra
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[13 Nov 2009 06:38 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix