ब्रह्मराक्षस का सजल उर शिष्य : मुक्तिबोध
छायावादोत्तर प्रगतिशील कविता की एक परम्परा केदारनाथ अग्रवाल,नागार्जुन और त्रिलोचन की है तो दूसरी परम्परा के वाहक हैं मुक्तिबोध . बीसवीं सदी की हिंदी कविता का सबसे बेचैन,सबसे तड़पता हुआ और सबसे ईमानदार स्वर हैं गजानन माधव मुक्तिबोध . मुक्तिबोध की कवित...
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PRIYANKAR
मुक्तिबोध
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[13 Nov 2009 03:51 AM]



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