रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे

DREAM प्रस्तुत है एक भजन और " श्याम श्याम भजो " कैसेट से. रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे प्रीत का बंधन कान्हा, बाँध के ना तोड़ो रे रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे........................ तुमसे बिछुड़ कर,मैंने ये जाना रे तुम बिन मेरो, कोई नही... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश स्वप्न
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[12 Nov 2009 23:11 PM]

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