एक ब्लोगवाणी पसंद का सवाल है बाबा ... जो दे उसका भी भला जो न दे उसका भी भला
कल हमने भेजे याने कि खोपड़ी पर लिखने के लिये खूब खोपड़ी खपाया, उसे लिखने के लिये दो घंटे की मशक्कत के बदले सिर्फ छः ब्लोगवाणी पसंद ही पाया, इतनी कम पसंद? क्या हम इतने गये गुजरे हैं? ये सब सोच कर हमारा भेजा भन्नाया अरे! ये तो कविता बनती जा रही है। नहीं...
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जी.के. अवधिया
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[12 Nov 2009 23:11 PM]



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