"वक्त की पाठशाला में एक साधक"-श्री समीर लाल ’समीर' , बिखरे मोती की समीक्षा सुप्रसिद्ध शायरा आदरणीया देवी नागरानी जी की क़लम से । पंकज सुबीर
श्री समीर लाल समीर काव्य संग्रह बिखरे मोती समीक्षक देवी नागरानी जी कलम आम इन्सान की ख़ामोशियों की ज़ुबान बन गई है. कविता लिखना एक स्वभाविक क्रिया है, शायद इसलिये कि हर इन्सान में कहीं न कहीं एक कवि, एक कलाकार, एक चित्रकार और शिल्पकार छुपा हुआ होता ह...
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पंकज सुबीर
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[12 Nov 2009 22:04 PM]



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