ग़ज़ल

जीवन सन्दर्भ जिन्दगी  आसपास  है / जाने क्यों फिर उदास है ?// टूटता है मन यहाँ बहुत / हर कोई किसी का खास है // भटक रही है रौशनी यहाँ / आज तम मे ही उजास है // गीत गा रही है गन्दगी / इत्र मे बसी उबास है  // मीत मेरे कुछ करो जरा / मुझ मे अब भी शेष प्या... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[12 Nov 2009 12:09 PM]

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