मेरा एक १०० वाँ पोस्ट

Kusum's Journey मेरा १०० वाँ पोस्ट मेरे उस साथी को समर्पित जिसने कभी मुझ पर विश्वास किया ।) "जीवन तो है क्षण भंगुर" बिछड़ कर ही समझ आता, क्या है मोल साथी का । जब तक साथ रहे उसका, क्यों अनमोल न उसे समझें । अच्छाइयाँ अगर धर्म है, क्यों गल्तियों पर उठे उँगली । सराहने म... [पूरी पोस्ट]
writer Kusum Thakur
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[12 Nov 2009 09:13 AM]

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