बाबा भारती का विश्वास मैने तोड़ा है

कृति अब मै चौराहे पर भीख मांगने वालों का करूँ क्या? बुरा देखने पर बुरा ही दिखता है। अच्छाई भी दब के रह जाती है। एक बार काफी साल पहले मै अपनी दोस्त के साथ आटो से आ रहा था, एक लड़की फूल बेचने आयी। गुलाब के फूल का गुच्छा दस रू का दे रही थी। हम अपनी बातों में... [पूरी पोस्ट]
writer अरविंद चतुर्वेदी
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[12 Nov 2009 05:13 AM]

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