ऊँची उड़ान
ऊँची उड़ान इस आसमां को छूने की हसरत रही है दिल में मैं पांवों पे उड़ के जाऊं,हाथों को भी बढाऊँ जितना भी पास जाऊं,वो दूर ही रहा था गर्दन उठायी जब भी,वो उड़ता ही जा राह था मैंने उड़ना नहीं था सीखा,सो दूर जा गिरी थी बैसाखियों के बल पर,कुछ पाना...
[पूरी पोस्ट]
रचना दीक्षित
चुम्बक
22
1
0
1
8
[12 Nov 2009 01:34 AM]



Shuffle








