dilvar

THOUGHT रहे दोस्त बन कर , जो दिल में हमारे , वही आज दिल को , दुखाने लगे हैं । जाने किस खता पर ,खफा हो के दिलवर , यूं सीने में खंजर , चुभाने लगे हैं । थीं उम्मीदें जिनसे , वफ़ा की जियादा , वो ही आज दामन , छुडाने लगे हैं । ये दुनियां दोरंगी , न जाना था हमने , ब... [पूरी पोस्ट]
writer radhasaxena
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[11 Nov 2009 22:14 PM]

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