मुरली तेरा मुरलीधर 30

अखिलं मधुरम् ज्यों तारक जल जल करते हैं धरती को शीतल मधुकर नीर स्वयं जल जल रखता है यथा सुरक्षित पय निर्झर वैसे ही मिट मिट प्रियतम को सत्व समर्पण कर पंकिल टेर रहा है सत्वसंधिनी मुरली   तेरा    मुरलीधर।।161।। प्राणों की मादक प्याली में प्रेम... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[11 Nov 2009 20:50 PM]

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