व्यंग्यजल बिल्लियों ने रास्ते काटे बहुत्

virendra jain ke nashtar व्यंग्यजल वीरेन्द्र जैन बिल्लियों ने रास्ते काटे बहुत हुये होंगे उन्हीं के घाटे बहुत गाल पर बच्चे के जब बोसा लिया खाये अपने गाल पर चांटे बहुत वो मिलन की रात आंखों में कटी यार को आये थे खर्राटे बहुत जब से उनके हुश्न को कांटा कहा मेरी राहों में बिछे का... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

व्यंग्यजल्

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[11 Nov 2009 14:02 PM]

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