मुझे आश्चर्य है इस कलम पर

आलोक वार्ता कभी-कभी मुझे इस कलम पर आश्चर्य होने लगता है। जो बात मुझे भी पता नहीं रहती है,उसे भी ये लिख देती है, व्यक्त कर देती है। कभी-कभी तो बहुत आश्चर्य हो जाता है, जो ये कलम लिख देती है वह होने लगता है। हँसिये-हँसिये आपको लग रहा होगा कि ये पागल लेखक अपनी फंता... [पूरी पोस्ट]
writer आलोक कुमार
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[11 Nov 2009 12:04 PM]

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