लैम्प पोस्ट
ये सुनसान फैली सड़क है लैम्प पोस्ट की रौशनी में चमचमाते भवन हैं एक के बाद एक सब में मरे पड़े हैं आदमी ये पूरा इलाका एक मुर्दा-घर है इस मुर्दा-घर में मैं अकेली खड़ी सन्नाटे के बीच तलाश रही हूं कब से एक अदद आदमी! हां , मुझे नींद में चलने की आदत है! .........
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sandhyagupta
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[11 Nov 2009 11:32 AM]



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