प्रभाष जी को गोरखपुर ने निराश नहीं किया-रोहित पाण्डेय
अब जबकि लोग इस पर भी लिखने लगे हैं कि 'प्रभाष जी पर इतना रूदन क्यूँ और पहले भी तो शलाका पुरुष गुजरे हैं'....फिर सदाग्रह पर एक और लेख देना कैसा होगा..? मै सोचने लगा. सोचने मै ये भी लगा कि लोग इतना क्यूं लिख रहे हैं..जवाब बहुत आसानी से मिला मुझे...ठीक...
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श्रीश पाठक 'प्रखर'
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[11 Nov 2009 08:25 AM]



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