तुम गर जरा मुझे प्यार दो

कलम का सिपाही गीत -राजेश त्रिपाठी मेरे गीतों को दे दो मधुर रागिनी, मेरे सपनों को होने साकार दो। सारी दुनिया की खुशियां मिल जायेंगी, तुम गर जरा मुझे प्यार दो।। कामनाएं तड़पती, सिसकती रहीं। जिंदगी इस कदर दांव चलती रही।। हम वफाओं का दामन थामे रहे। हर कदम जिंदगी हमको... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi
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[11 Nov 2009 04:43 AM]

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