गर्ज़ू नचनिया तेल दै दै नाचे...!

satyarthmitra ग्रामीण परिवेश में बिताए बचपन के दिनों से मेरे मन में अमिट रूप में जो चरित्र अंकित हैं उनमें ‘नाच पार्टी’ में स्त्री पात्रों की भूमिका निभाने वाले मर्दों की छवि विशेष कौतूहल का विषय रही है। यह ‘नाच’ शादी-विवाह के अवसर पर बारातियों के मनोरंजन के लिए आ... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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[10 Nov 2009 23:53 PM]

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