उठो !
साथियों उठो!तुम नहीं जानतेक्या हुआ है?तुम पथरीले खेतों मेंसोना उगाने कीकोशिश करते हो..।और लोहा समझ करसरहद पर भेजते होअपने बच्चे....तुम नहीं जानतेबच्चे लोहे के नहीं होते...वे सरहद पर लोहा खाएँगे।वे शहीद नहींसियासत के हाथों पिटे हुएमोहरे होंगे...और कल...
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naturica
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[10 Nov 2009 23:18 PM]



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