ऊपर वाले से झगड़ बैठा में
अब तो हद्द ही कर दी इसने, जितना दबो उतना दबाता है। शरीर से लाचार कर दिया, मान लिया, गिरा पड़ा थका में फ़िर चल दिया। उसको सुलग गयी। पिछले ढाई साल से लगातार दर्द में हूँ पर आज तक उफ नहीं की। पर इधर जो बीती है कुछ दिन से उसका क्या कहूं। बस अपना दिल बहला ल...
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rajkumar jha
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[10 Nov 2009 20:49 PM]



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