आओ देखें इक स्वप्न नया........

MERA SAGAR आओ देखें इक स्वप्न नया, नई रचना हों, नई उम्मीदें,   छोटी-छोटी सी ख्वाहिशें हो,   हो अपनों की खुशियां जिनमें।   पल-पल के सपने तैर रहे,   छोटी-छोटी आशाओं में,   मन मचल रहा छूने को यूं,   हो सीप में,... कोई मोती जैसे। ठण्डी... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[10 Nov 2009 19:48 PM]

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