आचार्य संजीव ‘सलिल’ की दो लघुकथाएं
लघुकथा
एकलव्य
‘नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?’
- ‘हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है.’
- ‘उसने व्यर्थ ही भोंकते कुत्तों का मुंह तीरों से बंद कर दिया था ?’
-’हाँ बेटा.’
- ‘दूरदर्शन और सभाओं में नेताओं औ...
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महावीर
लघु कथा
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[10 Nov 2009 18:33 PM]



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