सुना है उनकी तस्वीर ईनाम पाने को है
रोते बच्चे जो, मोहताज़ दाने-दाने को है सुना है उनकी तस्वीर ईनाम पाने को है फिर मुस्कुराती है, हर इक बात पर वो, आँखों में उसकी सावन छाने को है. सहमने लगा हैं यह शहर शाम ही से, लगता है कोई त्योहार आने को है बदलने...
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Sudhir (सुधीर)
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[10 Nov 2009 14:04 PM]



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