प्रभाष जोशी की याद में

dikhsa दीक्षा Anand rai मुंबई विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष आचार्य रामजी तिवारी ने प्रभाष जोशी को रुंधे गले से याद करते हुए जब कहा- चाहे जितना कह जाएँ, अनकहा बहुत रह जाएगा. तब सबकी आँखे नम थीं. प्रभाष जी के साथ के कई प्रेरक प्रसंगों को सुनाते हुए वे बेहद भावुक... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द राय
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[10 Nov 2009 11:15 AM]

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