आदरणीय हिंदी हमें शर्म है खुद पर

कलमबंद मेरी प्यारी हिंदी क्या कहूं, लेकिन धीमे से ही कहुंगा कि प्लीज किसी से कहना मत कि बहुत से लोग तुम्हे जानते हैं। नहीं तो वो मुंबई नहीं जा पायेंगे। वैसे क्या चल रहा है आजकल, बड़े चर्चे सुन रहा हूं। तुम्हारे चर्चे तो विधानसभा में भी गूंजने लगे हैं। तुम्ह... [पूरी पोस्ट]
writer शशांक शुक्ला
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[10 Nov 2009 05:16 AM]

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