सुनो ...
आसमान की तरह ""खाली आँखे "" धरती की तरह "चुप लगते "सब बोल हैं पर तुम्हारे कहे गए एक लफ्ज़ " सुनो "में जैसे वक्त का साया ठहर सा जाता है बिना अर्थ ,बिना संवाद के भी यह लफ्ज़ न जाने कितनी बातें कह जाता है कभी लगता है यह भोर का तारा कभी सांझ का गुलाबी आँ...
[पूरी पोस्ट]
रंजना [रंजू भाटिया]
38
7
0
7
25
[10 Nov 2009 02:47 AM]



Shuffle








