सुनो ...

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** आसमान की तरह ""खाली आँखे "" धरती की तरह "चुप लगते "सब बोल हैं पर तुम्हारे कहे गए एक लफ्ज़ " सुनो "में जैसे वक्त का साया ठहर सा जाता है बिना अर्थ ,बिना संवाद के भी यह लफ्ज़ न जाने कितनी बातें कह जाता है कभी लगता है यह भोर का तारा कभी सांझ का गुलाबी आँ... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[10 Nov 2009 02:47 AM]

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