प्यार तुम्हारा मोर पंख सा...

मीत पास नहीं हो दूर हो तुम, पर बसे हुए हो नयनों में प्यार तुम्हारा मोर पंख सा, रखा है मन के पन्नों में सदा नहीं अब गूंज रही है, सन्नाटा बोले कर्णों पे पर गीत तुम्हारे सजल सजल, शब्द बने हैं अधरों पे काश कहीं से आ जाते तुम, कसक मिटाते जन्मों की साथ बैठ कर... [पूरी पोस्ट]
writer मीत
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[10 Nov 2009 01:34 AM]

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