दर्द में डूबी हिंदी

मन उवाच..... मैं हिंदी हूं। मेरे नाम पर, हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदोस्तां हमारा रचा गया। काल के कपाल पर मैंने इतिहास और साहित्य रचा। अपने शब्दों से कवि पैदा किए। मेरे भीतर हिन्दुस्तान की संस्कृति समाई है। मैंने लोगों के भीतर हिन्दुस्तान को आज़ाद कराने का जज़्बा भ... [पूरी पोस्ट]
writer मधुकर राजपूत
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[10 Nov 2009 01:22 AM]

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