कुछ ज्ञात कुछ अज्ञात
कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा" हादसों के शहर में है कौन आज गा रहा, कौन आज प्यार की गुहार है लगा रहा। बंट चुका ये शहर आज नफरतों की आग से, गीत सारे गा रहे हैं अपने-अपने राग के, कौन आज शहर में नई तरंग ला रहा । घर के चार कोने, हर कोने का अलग पता, सबने...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[10 Nov 2009 00:22 AM]



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