अज़ब मिला , गज़ब मिला - जो दिल की राह मैं चला

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू किस कदर आती थी उनको, खुद को झुठलाने की कला. दिल घिरा था भीड़ से, वो भी क्या तन्हाई थी भला जिससे पीछा छूट गया, वो दिल्लगी थी या बला? हैरान हैं ये सोच कर, उसने क्यूं खुद को छला? शायद सुकून देता है, उन्हें अफसानों का सिलसिला हमराज़ जैसा ही दिखा, उनका हम... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan

hindi poetry

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[09 Nov 2009 12:35 PM]

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