अज़ब मिला , गज़ब मिला - जो दिल की राह मैं चला
किस कदर आती थी उनको, खुद को झुठलाने की कला. दिल घिरा था भीड़ से, वो भी क्या तन्हाई थी भला जिससे पीछा छूट गया, वो दिल्लगी थी या बला? हैरान हैं ये सोच कर, उसने क्यूं खुद को छला? शायद सुकून देता है, उन्हें अफसानों का सिलसिला हमराज़ जैसा ही दिखा, उनका हम...
[पूरी पोस्ट]
WindEnergyMan
hindi poetry
11
0
0
0
0
[09 Nov 2009 12:35 PM]



Shuffle








