वह प्राणवान भावावेश-प्रभाष जोशी
प्रखर पत्रकार और गाँधीवादी विचारक प्रभाष जोशी का असमय गुजर जाना.......} रात दो बजे मोबाइल की घंटी बजी तो एक बार तो बंद कर दी। पर वह फिर बजी। दूसरी तरफ रवीन्द्र त्रिपाठी थे। एक दुखद खबर, इससे शुरू कर खबर दी की प्रभाषजी का निधन हो गया। अरे! कहकर मोबाइल...
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सदाग्रह शांति सद्भावना के लिए...
प्रभाष जोशी
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[09 Nov 2009 10:19 AM]



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