उसका सोचना
बहुत दिन हुए उसे कुछ भी लिखे हुए। ऐसा नही था कि उसके दिमाग में हमेशा उठती रहने वाली कुलबुलाहट बंद हो गई थी। ऐसा भी नहीं था कि उसका मन उचट गया था, लिखते रहने से। सब कुछ पहले जैसा ही था - एग्जैक्ट्ली सेम । उसने बहुत बार कोशिश की थी कुछ लिखने की। कई बार...
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विकास कुमार
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[09 Nov 2009 04:20 AM]



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