...कि मैं जमीन के रिश्तों से कट गया यारों...

अस्तित्व एक बड़े शहर में रहने के अपने सुख और अपने दुख हैं....कह सकते हैं कि कोई भी सुख निरपेक्ष नहीं होता है या फिर बहुत आशावादी हैं तो यूँ भी कह सकते हैं कि दुख अपने साथ कोई-न- कोई उपहार लेकर आता है...कोई फर्क नहीं अलबत्ता....। हाँ तो एक साफ सफेद छुट्टी पर स... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[09 Nov 2009 01:45 AM]

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