चीथडों के गठ्ठर फ़ेंको

अनौपचारिक पता नहीं कैसे रहते हैं लोग आज भी लादे हुए सतत चीथडों का गठ्ठर जिसे कभी खोल कर नहीं देखा गया कि क्या है उसके अन्दर पता नहीं कितनी सडी हुई चीजें हैं उनमें जो मारती रहती हैं सडांध वक्त-बेवक्त तब छिडक देते हैं उनके ऊपर गुलाब जल और इत्र सुंदर शब्दों और व्... [पूरी पोस्ट]
writer अर्कजेश
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
5
[08 Nov 2009 21:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix