गुलज़ार साब और मेरी पहली त्रिवेणी….

मेरे विचार, मेरी कवितायें १- ज़िन्दगी क्या है जानने के लिये,     ज़िन्दा रहना बहुत ज़रूरी है।    आजतक कोई भी रहा तो नही॥ २- आओ हम सब पहन ले आईने,     सारे देखेगे अपना ही चेहरा।     सबको सारे हसी लगेगे यहा॥ ३- लब तेरे मीर ने... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[08 Nov 2009 15:14 PM]

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