यादें...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! बात आज से लगभग पंद्रह साल पुरानी है। तब मैं महज़ आठ साल का था। उस वक़्त मैं अपने होम टाऊन (डिंडोरी) में अपने पिताजी के साथ रहता था। पिताजी के साथ था इसलिए सुबह जल्दी उठ जाता था या यूँ कही कि उठना पड़ना था। एक दिन तडके हमारा दूध वाला दूध देने आया। उस... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

यादें

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[08 Nov 2009 14:34 PM]

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