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निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफ़ी है, हवा का रुख बदलने के लिये चाहत ही काफ़ी है. ज़रूरत ही नहीं अहसास को अल्फ़ाज़ की कोई, समुन्दर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफ़ी है. बडे हथियार लेकर लेकर जंग में शामिल हुए लोगों बुराई से निपटने के लिये कुदरत ही...
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वन्दना अवस्थी दुबे
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[08 Nov 2009 13:25 PM]



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