ज़िन्दगी अब एक अधूरी प्यास बनकर रह गई
ज़िन्दगी अब एक अधूरी प्यास बनकर रह गई हो सकी जो न वो मेरी आस बनकर रह गई कुछ दिनों तक ये थी मेरी बंदगी अब महज़ एक अनकही एहसास बनकर रह गई जुस्तजूं थी ये मेरी उम्मीद थी गुनगुनाता था जिसे वो गीत थी अब तमन्नाओं के फूल भी मुरझा गए नाउम्मीदी की झलक विश्वास ब...
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रामकृष्ण गौतम
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[08 Nov 2009 13:14 PM]



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