ज़िन्दगी अब एक अधूरी प्यास बनकर रह गई

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! ज़िन्दगी अब एक अधूरी प्यास बनकर रह गई हो सकी जो न वो मेरी आस बनकर रह गई कुछ दिनों तक ये थी मेरी बंदगी अब महज़ एक अनकही एहसास बनकर रह गई जुस्तजूं थी ये मेरी उम्मीद थी गुनगुनाता था जिसे वो गीत थी अब तमन्नाओं के फूल भी मुरझा गए नाउम्मीदी की झलक विश्वास ब... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[08 Nov 2009 13:14 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix