तुम याद आए...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! जब दिन निकला तुम याद आए जब सांझ ढली तुम याद आए जब चलूँ अकेले तन्हा मैं सुनसान सड़क के बीचों बीच धड़कन भी जोरों से भागे लगता मुझको कि यहीं कहीं अब भी तुम हो मेरे आसपास जब कोयल मेरे कानों में एक मधुर सी तान सुना जाए लगता मुझको ऐसा जैसे तुम याद आए तुम या... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम
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[08 Nov 2009 13:14 PM]

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