वसुधैव कुटुम्बकम?

निर्मल-आनन्द दुनिया भर में फैले हुए प्रवासी भारतीयों को यदि उन देशों के बहुसंख्यक लोग गोमांस खाने पर मजबूर करने लगे तो उन्हे कैसा लगेगा। यदि वो अपनी मरजी से ऐसा करते हैं तो किसी को कोई आपत्ति क्यों होगी लेकिन यदि उन पर यह बाध्य कर दिया जाय कि यदि उस देश में रहना... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी
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[08 Nov 2009 12:19 PM]

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