यादों के झरोखों से भाग ३..........................

एक प्रयास रवि और निशा की शायद यही परिणति है ...............मिलकर भी न मिलना। यही तसल्ली दिल को देकर आगे के बारे में सोचना शुरू किया। अब मैं अपने पुराने घावों को भूल एक नए सिरे से आजाद पंछी की भांति जीवन- यापन करने की सोचने लगी। पिता के घर में किसी बात की कमी त... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[08 Nov 2009 09:11 AM]

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