सिर्फ क्रिकेट पर ही हायतौबा क्यों?
एक मैच में हार और निराशा की बौछार। यही होता है भारत के क्रिकेट प्रशंसकों के साथ। हर क्रिकेट मैच के साथ वह टीवी से ऐसे चिपक जाता है मानो फेविकॉल का प्रचार कर रहा हो। हार-जीत तो खेल का शाश्वत नियम है, पर वह यह नहीं जानना चाहता। सिर्फ एक हार हमारे नायक...
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ram shankar
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[08 Nov 2009 08:27 AM]



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