मुझ निर्धन के धन बस तुम हो ! : "नीरज"
धनियों के तो धन हैं लाखों ..... आज बीस-एक दिनों के बाद वहाँ से लौट के आया हूँ, जहां खुदा न करे किसी को जाना पड़े ......... और अगर जाने की नौबत आ ही जाए तो वापस तो कभी न आना पड़े........... मन में न जाने कितनी ही बातें हैं.......... मगर हमेशा की तरह खुद...
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अमिताभ मीत
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[07 Nov 2009 21:46 PM]



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