चीज कमाल है बिसलेरी भी...

मेरा कुछ सामान... झूम उठा मेरा   जहान , तुम जो   मिलने आई मुझे , काश ये ख्वाब नहीं हकीक़त होता ... ठहर   न पाए   आँखों   में , निकल गए   आंसू सारे , तुम जो बसे हो इन आँखों में ... एक समंदर सा बना डाला , इन   आंसुओं   का हमने देख... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[07 Nov 2009 17:13 PM]

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