मेरे घर में उस बुढ़ापे के लिये कमरा नहीं

मानसी जनसता के वार्षिकी विशेषांक में मेरी एक ग़ज़ल प्रकाशित हुई है। ग़ज़ल तो पुरानी है पर ये ख़बर अच्छी लग रही है। ग़ज़ल एक बार फिर - कहने को तो वो मुझे अपनी निशानी दे गया मुझ से लेकर मुझको ही मेरी कहानी दे गया जिसको अपना मान कर रोएँ कोई पहलू नहीं कहने को सारा... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी
views
22
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
14
[07 Nov 2009 16:56 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix