आम आदमी की पीड़ा

sahityakash अशोक प्रियरंजन जिंदगी के विविध रंगों से रूबरू कराती इन गजलों में मौजूदा दौर केआम आदमी की पीड़ा मुखर है । बदलते दौर में पनप रही समस्याओं, संवेदनहीनता, विसंगितयों, निराशा, अस्तित्व संकट और इंसानियत के संकट को गजलों में रेखांकित किया गया है । 'अजीब सा म... [पूरी पोस्ट]
writer dr ashok kumar mishra
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[07 Nov 2009 14:05 PM]

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