मेरी मज़बूरी???????????
मैं हंसती हूँ ताकि कोई मेरे आंसू देख न सके मैं रहती हूँ भीड़ में ताकि मेरी तन्हाई कोई महसूस न कर सके मैं चलती रहती हूँ ताकि मेरे जीवन का ठहराव कोई जान न सके मैं बिताती हूँ समय शोरगुल में ताकि कोई मेरे टूटे दिल की आवाज़ सुन न सके मैं खिलखिलाती हूँ फूलो...
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Shobhna Choudhary
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[07 Nov 2009 12:03 PM]



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